भारत–नेपाल सीमा से सटे रक्सौल में रविवार को आयोजित धार्मिक आयोजन उस वक्त सवालों के घेरे में आ गया, जब श्रद्धा का सैलाब व्यवस्था पर भारी पड़ गया। श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ में आचार्य अनिरुद्धाचार्य जी महाराज के सत्संग के दौरान अचानक उमड़ी भीड़ से आयोजन स्थल पर हालात बेकाबू हो गए। रक्सौल हवाई अड्डा परिसर में बना पंडाल कुछ ही देर में खचाखच भर गया और प्रवेश द्वारों पर दबाव इस कदर बढ़ा कि भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
कथावाचक के मंच पर पहुंचते ही श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। आयोजकों द्वारा पूर्व में अनुमानित भीड़ और वास्तविक उपस्थिति के बीच भारी अंतर साफ नजर आया। सीमित प्रवेश द्वार, कमजोर बैरिकेडिंग और प्रशिक्षित वालंटियर्स की कमी के कारण मुख्य गेट पर अफरातफरी फैल गई। इसी दौरान रेलिंग टूट गई, जिससे लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा।
अव्यवस्था के बीच कई श्रद्धालु घायल हो गए। अत्यधिक दबाव और गर्मी के कारण दो महिलाएं बेहोश हो गईं, जिन्हें मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासन की मदद से प्राथमिक उपचार दिया गया। हालांकि किसी गंभीर हादसे की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन कुछ देर के लिए आयोजन स्थल पर भय और भ्रम का माहौल बन गया।
बच्चों के बिछड़ने से बढ़ी चिंता
हंगामे के दौरान कई छोटे बच्चे अपने परिजनों से बिछड़ गए। आयोजन स्थल पर न तो कोई स्पष्ट हेल्प डेस्क दिखी और न ही ‘लॉस्ट एंड फाउंड’ जैसी व्यवस्था। मजबूरन माता-पिता भीड़ में बच्चों को ढूंढते नजर आए। इस लापरवाही को लेकर श्रद्धालुओं में खासा आक्रोश देखा गया और आयोजकों की तैयारी पर सवाल उठे।
वीआईपी संस्कृति पर भड़के श्रद्धालु
कार्यक्रम के दौरान वीआईपी व्यवस्था भी विवाद का कारण बनी। आम श्रद्धालुओं का आरोप रहा कि चंदा और टिकट व्यवस्था के नाम पर कुछ खास लोगों को अलग रास्ते और बेहतर सुविधाएं दी गईं, जबकि सामान्य भक्तों को धक्का-मुक्की झेलनी पड़ी। लोगों का कहना था कि इसी भेदभाव ने अव्यवस्था को और बढ़ावा दिया।
पुलिस के हस्तक्षेप से हालात काबू में
स्थिति बिगड़ते देख मौके पर तैनात पुलिस बल ने मोर्चा संभाला और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनीष आनंद ने स्पष्ट किया कि किसी तरह का लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भीड़ को पीछे हटाने और रास्ते खाली कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
प्रशासन सख्त, आयोजकों को चेतावनी
घटना को गंभीर मानते हुए अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार ने आयोजन समिति को कड़ी फटकार लगाई और निर्देश दिया कि रातों-रात सुरक्षा, प्रवेश-निकास, चिकित्सा और बच्चों के लिए सहायता संबंधी सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं। प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा कि आगे किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं आयोजन समिति की अध्यक्ष शिखा दास की ओर से देर शाम तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।यह घटना एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और प्रशासनिक समन्वय की अनिवार्यता को रेखांकित करती है। श्रद्धा के आयोजनों में सुरक्षा और समान व्यवस्था सुनिश्चित करना आयोजकों की जिम्मेदारी है—ताकि आस्था उत्सव में बदले, अफरातफरी में नहीं।